विपक्षी नेताओं का कहना है कि केरल एक “वेंटिलेटर” अर्थव्यवस्था है – राज्य की कर बढ़ाने की क्षमता में गिरावट आई है जबकि इसका कर्ज बढ़ गया है। इससे भी बुरी बात यह है कि अब पश्चिम एशिया संकट के कारण इसकी खपत प्रभावित हो सकती है। क्या लोकलुभावन नीतियां घटते खजाने से बच सकती हैं?
वेतन, पेंशन और वादे: कैसे केरल की राजकोषीय गड़बड़ी मतपेटी पर मंडरा रही है

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