दिल्ली विश्वविद्यालय ने साइबर सुरक्षा, छात्र प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए गृह मंत्रालय के I4C के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

दिल्ली विश्वविद्यालय ने साइबर सुरक्षा, छात्र प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए गृह मंत्रालय के I4C के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

दिल्ली विश्वविद्यालय ने साइबर सुरक्षा, छात्र प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए गृह मंत्रालय के I4C के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
दिल्ली विश्वविद्यालय ने गृह मंत्रालय के I4C के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने साइबर सुरक्षा, जागरूकता और क्षमता निर्माण पर सहयोग का विस्तार करने के लिए गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।समझौते पर सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में वाइस रीगल लॉज के काउंसिल रूम में डीयू रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता और आई4सी निदेशक निशांत कुमार ने हस्ताक्षर किए।

साइबर जागरूकता पर ध्यान दें

साझेदारी का उद्देश्य जागरूकता अभियानों, कार्यशालाओं, सेमिनारों और छात्र सहभागिता कार्यक्रमों के माध्यम से विश्वविद्यालय के भीतर एक मजबूत साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।दोनों संस्थान हैकथॉन, प्रतियोगिताओं, इंटर्नशिप, साइबर स्वयंसेवक पहल और साइबर सुरक्षा से संबंधित शैक्षणिक गतिविधियों पर भी मिलकर काम करेंगे। सहयोग को बढ़ावा मिलेगा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रमों को अधिसूचित किया और सरकार और शिक्षा जगत के बीच ज्ञान साझा करने को प्रोत्साहित किया।

छात्रों के लिए क्षमता निर्माण

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि साझेदारी का उद्देश्य अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण में भाग लेने के अवसर पैदा करते हुए साइबर अपराध की रोकथाम और साइबर स्वच्छता के बारे में छात्रों की समझ में सुधार करना है।प्रोफेसर संजीव सिंह की पहल के तहत सहयोग की सुविधा प्रदान की गई। हस्ताक्षर समारोह में प्रो. के. रत्नाबली और डीयू और आई4सी दोनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब विश्वविद्यालय उद्योग और सरकारी भागीदारी के माध्यम से कक्षाओं से परे साइबर सुरक्षा शिक्षा का तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

राजेश मिश्रा एक शिक्षा पत्रकार हैं, जो शिक्षा नीतियों, प्रवेश परीक्षाओं, परिणामों और छात्रवृत्तियों पर गहन रिपोर्टिंग करते हैं। उनका 15 वर्षों का अनुभव उन्हें इस क्षेत्र में एक विशेषज्ञ बनाता है।