वैदिक परंपरा के अनुसार, नौ ग्रह या नवग्रह हैं। ये हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं। नवग्रह यंत्र या प्रत्येक ग्रह को समर्पित 9 अलग-अलग यंत्र हैं। इनका उपयोग आपके ग्रहों को संतुलित करने और लोगों को तनाव से छुटकारा दिलाने और आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करने के उपाय के रूप में किया जाता है। आप अपनी जन्मतिथि या राशि के अनुसार सही यंत्र पा सकते हैं। आइए करीब से देखें: अपनी जन्मतिथि (एकल अंक) की गणना कैसे करें:एक एकल-अंकीय जन्म-संख्या (जिसे उनका कर्म या जीवन-संख्या भी कहा जाता है) आपकी जन्मतिथि के अंकों को जोड़कर प्राप्त किया जा सकता है जब तक कि आपको 1-9 प्राप्त न हो जाए (उदाहरण के लिए, 23 को जन्म लेने वालों के लिए 2+3 = 5 जोड़ें)। अब यह अंक बुद्ध या बुध ग्रह से जुड़ा है। नीचे नौ यंत्र सुझाव दिए गए हैं।1-सूर्य यंत्र

1, 10, 19, 28 तारीख को जन्मे लोग सूर्य द्वारा निर्देशित होते हैं। सूर्य यंत्र आत्मविश्वास बढ़ाने, स्वास्थ्य और अधिकार में मदद करता है। परंपरागत रूप से केंद्रीय बिंदु और सौर ज्यामितीय रेखाओं से उत्कीर्ण स्वर्ण या तांबे के यंत्र का उपयोग किया जाता है। कहां रखें: इस यंत्र को पूर्वी दीवार पर या पूजा घर पर रखें। लाभ: यह काम में स्पष्ट उद्देश्य और बेहतर पहचान में मदद करता है। 11 दिनों तक सूर्योदय के समय एक छोटा सूर्य मंत्र (जैसे “ओम सूर्याय नमः”) अर्पित करके सक्रिय करें। 2 – चंद्र (चंद्रमा) यंत्रकिसी भी महीने की 2, 11, 20 और 29 तारीख को जन्म लेने वाले लोग चंद्रमा द्वारा निर्देशित होते हैं। चंद्र यंत्र भावनात्मक संतुलन, रिश्ते और मानसिक शांति बनाने में मदद करता है। चांदी या सफेद धातु के यंत्रों का प्रयोग किया जाता है।कहां रखें: इस यंत्र को घर या शयनकक्ष के उत्तर-पूर्व (ईशान) में पानी के पास रखें। इसकी नियमित रूप से दूध और सफेद फूलों से पूजा करने की सलाह दी जाती है। ॐ चन्द्राय नमः का जाप करें. लाभ: चिंता को शांत करने में मदद करता है और नींद में सुधार करता है।3-मंगल यंत्र3, 12, 21 और 30 तारीख वाले व्यक्ति बृहस्पति के प्रभाव में आते हैं। यदि आपका अंक 3 है तो बुद्धि और विस्तार के लिए गुरु (बृहस्पति) यंत्र चुनें। ये पीले या सुनहरे यंत्र हैं। कहां रखें : इसे आप उत्तर-पूर्व दिशा में या स्टडी रूम में रख सकते हैं। पीले फूल, हल्दी चढ़ाएं और ॐ गुरवे नमः का जाप करें। लाभ: सीखने और मार्गदर्शन में मदद करता है।4-राहु यंत्रराहु यंत्र भ्रम, अचानक परिवर्तन और महत्वाकांक्षा के लिए है। राहु यंत्र प्रायः मिश्रित धातुओं से बनाये जाते हैं। यंत्र पर काले चने चढ़ाने और राहु मंत्रों का जाप करने का सुझाव दिया जाता है। कहां रखें : राहु यंत्र को वायव्य कोण में गुप्त रूप से रखा जाता हैलाभ: यह महत्वाकांक्षा को रचनात्मक रूप से प्रसारित करता है और अचानक असफलताओं के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।5—गुरु (बृहस्पति) यंत्रजन्मांक 4 बृहस्पति ऊर्जा के साथ युग्मित है। गुरु यंत्र ज्ञान और विस्तार को बढ़ाता है। पीले या सुनहरे यंत्र गुरु की ऊर्जा से प्रतिध्वनित होते हैं। कहां रखें : इसे उत्तर-पूर्व दिशा या अध्ययन क्षेत्र में रखें। पीले फूल चढ़ाएं और “ओम गुरवे नमः” का जाप करें। लाभ: सीखने के अवसर और परामर्श कनेक्शन।5—बुध (बुध) यंत्र

जन्म संख्या 5 बुद्ध (बुध) ऊर्जा के साथ संरेखित है। एक बुध यंत्र संचार और अध्ययन में मदद करता है। हरे या पीतल के यंत्र अच्छा काम करते हैं। कहां रखें: बुद्ध यंत्र किताबों, कार्यस्थलों के पास रखने पर सबसे अच्छा काम करते हैं। पढ़ाई से पहले ॐ बुधाय नमः का जाप करें.लाभ: स्पष्ट विचार और बेहतर भाषण का समर्थन करता है।6—शुक्र यंत्रकिसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को जन्मे लोग शुक्र की ऊर्जा से जुड़ते हैं। शुक्र यंत्र रचनात्मकता, रिश्तों और आराम को प्रोत्साहित करता है। ये गुलाबी, सफेद या चांदी से बने होते हैं। कहां रखें: इसे शयनकक्ष या कार्यक्षेत्र में रखें और “ओम शुक्राय नमः” का जाप करें।लाभ: साझेदारी, विलासिता और रचनात्मकता में सामंजस्य।7- केतु यंत्रयदि आपका जन्मांक 7 है, तो केतु यंत्र आध्यात्मिक विकास में सहायता करता है। यह अलगाव और गहरे कर्म बंधनों को सुलझाने में मदद करता है। ये धुएँ के रंग या राख के स्वर वाले तांबे या मिश्रित धातु के यंत्र हैं। धूप, बिल्व पत्र चढ़ाएं और केतु मंत्र का जाप करें। कहां रखें: किसी शांत स्थान पर रहें और केतु मंत्रों का जाप करेंलाभ: नियमित अभ्यास से स्पष्टता आती है और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि को बढ़ावा मिलता है।8—शनि यंत्र

अंक 8 के लिए, शनि यंत्र अनुशासन और दीर्घकालिक बाधाओं को दूर करने में मदद करता है। ये काले या लौह धातु से बने होते हैं। कहां रखें: उत्तर-पश्चिम या अध्ययन/कार्यालय में रखें। तेल अर्पण से सक्रिय करें, काले तिल के तेल का दीया, ॐ शनिचराय नमः का जाप करें।लाभ: शनि यंत्र धैर्य, कम देरी और कार्मिक स्थिरता में मदद करता है।9—मंगल यंत्रयदि आपकी उम्र 9 वर्ष है, तो मंगल यंत्र साहस और सुरक्षा में मदद करता है। यह बाधाओं और गलतफहमियों पर काबू पाने के लिए उपयोगी है। इसे परंपरागत रूप से तांबे से बनाया जाता है। कहां रखें: दक्षिण-पूर्व दिशा में या अपने कार्य डेस्क पर रखें और “ओम मंगलाय नमः” का जाप करें।लाभ: इच्छाशक्ति, ऊर्जा को मजबूत करने और संघर्षों को सुलझाने में मदद करता है।तो अपनी जन्मतिथि जांचें और अपना आदर्श यंत्र ढूंढें।





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